अब किसे चाहें किसे ढूँढा करें
वो भी आख़िर मिल गया अब क्या करें
वो भी आख़िर मिल गया अब क्या करें
आँख मूँदे उस गुलाबी धूप में
देर तक बैठे उसे सोचा करें
देर तक बैठे उसे सोचा करें
दिल मुहब्बत दीन-दुनिया शायरी
हर दरीचे से तुझे देखा करें
हर दरीचे से तुझे देखा करें
घर नया कपड़े नये बर्तन नये
इन पुराने काग़ज़ों का क्या करें
इन पुराने काग़ज़ों का क्या करें
- बशीर बद्र
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