चांदनी रात में कुछ फीके सितारों की तरह
याद मेरी हैं वहां गुज़री बहारों की तरह
याद मेरी हैं वहां गुज़री बहारों की तरह
ज़ज्ब होती रही हर बूंद मेरी आँखों में
बात करता रहा वो हलकी फुहारों की तरह
ये बियाबां सही तनहा तो यहाँ कुछ भी नहीं
दूर तक फैलें हैं साये भी चिनारों की तरह
दूर तक फैलें हैं साये भी चिनारों की तरह
बात बस इतनी है इस मोड़ पे रस्ता बदला
दो कदम साथ चला वो भी हजारों की तरह
दो कदम साथ चला वो भी हजारों की तरह
कोई ताबीर नहीं कोई कहानी भी नहीं
मैनें तो ख्व़ाब भी देखें हैं नजारों की तरह
मैनें तो ख्व़ाब भी देखें हैं नजारों की तरह
बादबां खोले जो मैनें तो हवाएँ पलटी
दूर होता गया इक शख्स किनारों की तरह
दूर होता गया इक शख्स किनारों की तरह
फातिमा तेरी ख़ामोशी को भी समझा है कभी
वो जो कहता रहा हर बात इशारों की तरह
वो जो कहता रहा हर बात इशारों की तरह
- फातिमा हसन
No comments:
Post a Comment