Wednesday, 28 June 2017

ये दरवेशों की बस्ती है यहाँ ऐसा नहीं होगा

ये दरवेशों की बस्ती है यहाँ ऐसा नहीं होगा
लिबास ऐ ज़िन्दगी फट जाएगा मैला नहीं होगा
शेयर बाज़ार में कीमत उछलती गिरती रहती है

आदमी आदमी से मिलता है

आदमी आदमी से मिलता है
दिल मगर कम किसी से मिलता है
भूल जाता हूँ मैं सितम उस के

प्यार दिल में है अगर प्यार से दो बात भी हो

प्यार दिल में है अगर प्यार से दो बात भी हो
यों न उमड़ा करें बादल, कभी बरसात भी हो
उनसे परदा है जिन्हें दिल की बात कहनी है

लोग हर मोड़ पे रुक-रुक के संभलते क्यों हैं

लोग हर मोड़ पे रुक-रुक के संभलते क्यों हैं
इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यों हैं
मैं न जुगनू हूँ, दिया हूँ, न कोई तारा हूँ

कितने ऐश उड़ाते होंगे, कितने इतराते होंगे

कितने ऐश उड़ाते होंगे, कितने इतराते होंगे
जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे
यारो कुछ तो बात बताओ उस की क़यामत बाहों की

तन्हा शुरू किया था जो सफर कैसा है

तन्हा शुरू किया था जो सफर कैसा है
दिल में तेरे छुपा हुआ वो डर कैसा है
घर छोड़ के तो आ गये जंगल में अब बता

प्यार की हम तो इशारों से बात करते हैं

प्यार की हम तो इशारों से बात करते हैं
फूल जिस तरह बहारों से बात करते हैं
कुछ तो है और भी इन ख़ाक के पुतलों में ज़रूर