Thursday, 29 June 2017

कभी ख़ुशी से खुशी की तरफ़ नहीं देखा- मुनव्वर राना

कभी ख़ुशी से खुशी की तरफ़ नहीं देखा
तुम्हारे बाद किसी की तरफ़ नहीं देखा

ये सोचकर कि तेरा इन्तज़ार लाज़िम है

नाकामियों की बाद भी हिम्मत वही रही- मुनव्वर राना

नाकामियों की बाद भी हिम्मत वही रही
ऊपर का दूध पी के भी ताक़त वही रही

शायद ये नेकियाँ हैं हमारी कि हर जगह

इसी गली में वो भूखा किसान रहता है- मुनव्वर राना

इसी गली में वो भूखा किसान रहता है
ये वो ज़मीन है जहाँ आसमान रहता है

मैं डर रहा हूँ हवा से ये पेड़ गिर न पड़े

कोई चेहरा किसी को उम्र भर अच्छा नहीं लगता- मुनव्वर राना

कोई चेहरा किसी को उम्र भर अच्छा नहीं लगता
हसीं है चाँद भी, शब भर अच्छा नहीं लगता

अगर स्कूल में बच्चे हों घर अच्छा नहीं लगता

वो महफ़िल में नहीं खुलता है तनहाई में खुलता है- मुनव्वर राना

वो महफ़िल में नहीं खुलता है तनहाई में खुलता है
समुन्दर कितना गहरा है ये गहराई में खुलता है


जब उससे गुफ़्तगू कर ली तो फिर शजरा नहीं पूछा

चंद शेर-मुनव्वर राना

1.
हम कुछ ऐसे तेरे दीदार में खो जाते हैं
जैसे बच्चे भरे बाज़ार में खो जाते हैं

2.
नये कमरों में अब चीजें पुरानी कौन रखता है

सबके कहने से इरादा नहीं बदला जाता- मुनव्वर राना

सबके कहने से इरादा नहीं बदला जाता
हर सहेली से दुपट्टा नहीं बदला जाता

हम कि शायर हैं सियासत नहीं आती हमको